होलसेल के धंधे में एक ही रेट हर खरीदार पर नहीं चलता। एक डिस्ट्रीब्यूटर वही माल सुपर-स्टॉकिस्ट को ₹180 में, डीलर को ₹195 में और लोकल रिटेलर को ₹210 में बेचता है। शाम की भीड़ में जब बिलिंग स्टाफ ये रेट हाथ से टाइप करता है, तो गलती होना आम बात है, और एक छोटी-सी गलती पूरे बिल का मार्जिन खा जाती है।
अगर आप अपने बिलिंग software में पार्टी-वाइज़ रेट और क्वांटिटी स्लैब सेट कर दें, तो तय रेट अपने आप आ जाता है: software पार्टी और ऑर्डर की मात्रा देखकर सही कीमत लगा देता है। इससे मार्जिन बचता है, खरीदारों से झगड़े नहीं होते और GST invoice भी सही बनते हैं।
होलसेल में पार्टी-वाइज़ रेट का मतलब क्या है
हर खरीदार से आपका रिश्ता अलग होता है। जो सेमी-होलसेलर रोज़ नकद में माल उठाता है, उसका रेट उस रिटेलर जैसा नहीं हो सकता जो महीने में एक बार ऑर्डर देता है। पार्टी-वाइज़ रेट में आप हर पार्टी के लिए उसका नेट रेट, स्पेशल रेट या discount सेव कर देते हैं, यानी एक ही स्टैंडर्ड रेट पर टिके रहने की ज़रूरत नहीं। जैसे, अगर एक कार्टन आम तौर पर ₹1,000 का बिकता है, तो पार्टी A का खाता चुनते ही software ₹920 और पार्टी B के लिए ₹950 अपने आप लगा देगा।
इससे काउंटर पर काम तेज़ चलता है: भीड़ के समय स्टाफ को रेट पर मोलभाव नहीं करना पड़ता, और नया ऑपरेटर भी आपसे पूछे बिना सही बिल बना लेता है। साथ ही पूरा रिकॉर्ड बना रहता है। अगर कोई ग्राहक पुराने invoice पर सवाल उठाए या आपका अकाउंटेंट मार्जिन देखे, तो हर पार्टी का रेट और discount लेजर में मिल जाता है।
क्वांटिटी स्लैब और टियर वाले रेट कैसे काम करते हैं
टियर वाले रेट आम तौर पर दो तरह से सेट होते हैं: ग्राहक की कैटेगरी के हिसाब से (डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर, रिटेलर) या मात्रा के हिसाब से। इन चार स्टेप में सेटअप करें:
- आइटम मास्टर में बेस रेट डालें। MRP, खरीद रेट और डिफ़ॉल्ट होलसेल रेट भरें। जैसे, किसी आइटम का MRP ₹500 और खरीद ₹350 है, तो होलसेल रेट ₹420 रखा जा सकता है।
- क्वांटिटी स्लैब बनाएं। जैसे: 1–50 पीस पर ₹420, 51–200 पीस पर ₹400, और 201 या उससे ज़्यादा पीस पर ₹380 प्रति पीस।
- हर पार्टी को कैटेगरी या रेट से जोड़ें। हर खरीदार को उसकी डीलर कैटेगरी में डालें, या उससे तय हुआ स्पेशल रेट सेव करें, ताकि invoice पर सही रेट आए।
- फ्लोर रेट तय करें। हर आइटम या ग्रुप के लिए सबसे कम रेट तय कर दें, ताकि भीड़ में गलती से कोई लागत से नीचे न बेच दे।
पार्टी रेट का invoice के GST पर असर
GST ट्रांज़ैक्शन वैल्यू पर लगता है। बिक्री के समय जो discount invoice पर दिखाया जाता है, वह वैल्यू से घट जाता है। यानी जब आप किसी पार्टी को उसके स्पेशल नेट रेट पर बिल करते हैं, तो GST उसी नेट रेट पर लगेगा, लिस्ट प्राइस पर नहीं। बाद में दिया गया discount, जैसे महीने के आखिर में टर्नओवर रिबेट, credit note से एडजस्ट होता है। 1 October 2025 से सप्लायर ऐसे credit note पर अपना GST तभी घटा सकता है जब खरीदार ने उससे जुड़ा input tax credit (ITC) reverse कर दिया हो।
22 September 2025 के GST रेट बदलाव के बाद ज़्यादातर सामान दो मुख्य स्लैब में आ गया है, 5% और 18%, और कुछ लग्ज़री व सिन गुड्स पर 40%। कुछ आइटम ऐसे हैं जिन पर रेट खुद प्रति पीस कीमत पर निर्भर करता है। सबसे जाना-माना उदाहरण रेडीमेड कपड़े हैं: ₹2,500 प्रति पीस तक 5% GST और ₹2,500 से ऊपर 18% GST (बदलाव से पहले यह सीमा ₹1,000 थी और उससे ऊपर 12% लगता था)।
इसलिए ऐसे आइटम पर पार्टी का discount सिर्फ रकम नहीं, रेट भी बदल सकता है। आपके बिलिंग software को हर लाइन पर प्रति पीस नेट कीमत देखकर GST रेट लगाना चाहिए, और discount असली होना चाहिए और invoice पर दिखना चाहिए।
एक कपड़ा होलसेलर दो पार्टी को बिल करे, तो हिसाब कुछ ऐसा बनेगा:
| पार्टी | मात्रा | लिस्ट रेट (प्रति पीस) | discount (प्रति पीस) | नेट रेट (प्रति पीस) | GST रेट | लाइन पर GST |
|---|---|---|---|---|---|---|
| रिटेलर (स्टैंडर्ड रेट) | 20 पीस | ₹2,700 | ₹0 | ₹2,700 | 18% | ₹9,720 |
| डिस्ट्रीब्यूटर (बल्क स्लैब) | 100 पीस | ₹2,700 | ₹300 | ₹2,400 | 5% | ₹12,000 |
ऐसे स्लैब बनाने से पहले अपने HSN code का मौजूदा रेट CBIC की रेट वाली पेज पर ज़रूर देख लें।
फील्ड सेल्स और मोबाइल ऑर्डर में पार्टी रेट
रूट पर ऑर्डर बुक करने वाले सेल्समैन कागज़ की रेट लिस्ट के भरोसे नहीं चल सकते। अगर सेल्समैन पुराना रेट बता दे या ऐसा माल देने का वादा कर दे जो स्टॉक में नहीं है, तो डिलीवरी में देरी और बिल पर झगड़ा होना तय है।
ValueSoft CSR App से फील्ड स्टाफ अपने फोन से ऑर्डर बुक करता है, स्टॉक देखता है और invoice शेयर करता है, और सब कुछ बैक ऑफिस के साथ तुरंत sync होता है, इसलिए ऑर्डर दोबारा टाइप नहीं करने पड़ते। डिस्ट्रीब्यूटर के काउंटर पर ValueSoft FMCG Wholesaler & Distributor Software केस/पीस बिलिंग, scheme और QPS, सेल्समैन-वाइज़ बिलिंग और गोदाम का स्टॉक संभालता है।
रिटेलर सीधे ऑर्डर भी दे सकते हैं। ValueSoft eRetail App से आपके ग्राहक अपने फोन से ऑर्डर देते हैं, स्टॉक देखते हैं और अपना लेजर व बकाया चेक करते हैं।
रेट लिस्ट और scheme के लिए अच्छी आदतें
- एक ही मास्टर रेट लिस्ट रखें। जब कंपनी कीमतें बदले, तो रेट लिस्ट एक ही जगह अपडेट करें (जहां software में सुविधा हो, Excel से इंपोर्ट करें), हर बिल अलग-अलग बदलने की ज़रूरत नहीं।
- फ्लोर रेट तय करें। हर आइटम ग्रुप का न्यूनतम रेट तय होने से काउंटर पर मनमाना discount रुकता है।
- हर महीने मार्जिन देखें। आइटम-वाइज़ बिक्री और खरीद रेट मिलाएं, ताकि जो रेट आपके टारगेट से नीचे चला गया हो वह पकड़ में आ जाए। ValueSoft inventory software आइटम, बैच और गोदाम के हिसाब से स्टॉक और रिपोर्ट दिखाता है।
- पार्टी लेजर और credit note जांचें। महीने के आखिर में हर पार्टी के रिबेट, कैश discount और स्लैब रेट को तय शर्तों से मिलाएं, और देखें कि जहां ज़रूरी हो, हर credit note के साथ खरीदार ने ITC reverse किया है।
मार्जिन बचाइए, बिलिंग आसान बनाइए
जब पार्टी रेट और क्वांटिटी स्लैब अपने आप लगते हैं, तो हर बिल पर सही वैल्यू और सही GST आता है, और काउंटर पर रेट को लेकर बहस बंद हो जाती है। Kala Softech Pvt. Ltd. का ValueSoft 1998 से कारोबारियों के साथ है: यह Windows पर चलता है, साथ में मोबाइल ऐप भी हैं, बिना इंटरनेट के काम करता है और डेटा का बैकअप अपने आप लेता है। आपकी होलसेल बिलिंग में यह कैसे काम आएगा, यह देखने के लिए kalasoftech.com पर फ्री डेमो बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डीलर और रिटेलर को अलग-अलग रेट पर बिल बिना हर बार हिसाब लगाए कैसे करें?
आइटम मास्टर में हर ग्राहक कैटेगरी या हर पार्टी का रेट और क्वांटिटी स्लैब सेव कर दें। बिल बनाते समय पार्टी चुनते ही और मात्रा डालते ही बिलिंग software तय रेट अपने आप लगा देता है।
क्या पार्टी को दिया गया discount invoice पर GST रेट बदल सकता है?
ज़्यादातर सामान पर नहीं: रेट HSN code से तय होता है, और invoice पर दिखाया गया discount सिर्फ टैक्सेबल वैल्यू घटाता है। कुछ आइटम पर रेट प्रति पीस कीमत से तय होता है। जैसे, 22 September 2025 से रेडीमेड कपड़ों पर ₹2,500 प्रति पीस तक 5% और उससे ऊपर 18% GST लगता है, यानी वहां प्रति पीस नेट कीमत से रेट तय होगा।
बिक्री के बाद दिए गए discount का GST में क्या होता है?
वह credit note से एडजस्ट होता है। 1 October 2025 से सप्लायर ऐसे credit note पर अपना GST तभी घटा सकता है जब खरीदार ने उससे जुड़ा input tax credit (ITC) reverse कर दिया हो।
स्रोत
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। GST के नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं, इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले GST पोर्टल देख लें या अपने CA से सलाह ले लें।